“साहब, मैं जिंदा हूं…” — रिकॉर्ड में मृत घोषित होने से बुजुर्ग की पेंशन बंद
“Sir, I am alive…” — Elderly man's pension stopped after being declared dead on record
हरियाणा के चीका क्षेत्र में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां वार्ड नंबर 3 के निवासी जोगिंद्र सिंह को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उनकी बुढ़ापा पेंशन रोक दी गई। जीवित होने के बावजूद खुद को “जिंदा” साबित करने के लिए उन्हें महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े।
जोगिंद्र सिंह के अनुसार, वर्ष 2023 में समाज कल्याण विभाग ने रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु दर्ज कर दी। इसके बाद जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक उनकी पेंशन बंद रही। जब कई महीनों तक बैंक खाते में पेंशन की राशि नहीं पहुंची तो उन्होंने संबंधित विभाग से संपर्क किया। वहां से जो जवाब मिला, वह चौंकाने वाला था—अधिकारियों ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उनकी मौत हो चुकी है।
यह सुनकर जोगिंद्र सिंह स्तब्ध रह गए। उन्होंने अधिकारियों के सामने अपने जीवित होने के प्रमाण प्रस्तुत किए, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान तुरंत नहीं हुआ। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह बन गई कि वह सरकारी रिकॉर्ड में खुद को जीवित सिद्ध करें।
जोगिंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने समाज कल्याण विभाग से लेकर उपायुक्त (डीसी) कार्यालय तक लिखित शिकायतें दी हैं, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। महीनों से पेंशन बंद होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और रिकॉर्ड प्रबंधन में संभावित त्रुटियों की ओर संकेत करता है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन बुजुर्गों के लिए जीवनयापन का महत्वपूर्ण साधन होती है। ऐसे में रिकॉर्ड में गलत मृत्यु दर्ज हो जाना न केवल गंभीर त्रुटि है, बल्कि संबंधित व्यक्ति के अधिकारों का हनन भी है।
अब जोगिंद्र सिंह को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या का शीघ्र समाधान करेगा, रिकॉर्ड दुरुस्त करेगा और रुकी हुई पेंशन की राशि जारी करेगा। यह घटना सरकारी तंत्र में डेटा सत्यापन और जवाबदेही की आवश्यकता को भी उजागर करती है